अफगानिस्तान पाकिस्तान की सीमा बढ़ते हुए तनाव का एक केंद्र बिंदु बन चूका है। ये तनाव हाल ही में हुए अफगान तालिबान सेना और पाकिस्तानी सेना मे हुए आपसी मतभेद के कारण बढ़ रहा है। अफगानिस्तान पाकिस्तान की यह तनाव पूर्ण स्थिति आंतरराष्ट्रीय चिंता का कारण बन रहा है। पिछले कुछ सालों से तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा बना लिया और अब वे लोग हम ही अफगानिस्तान है और हमे दुनिया मान्यता दे इसका प्रयास कर रहे है । तहरीक-ए-तालिबान यह संगठन पाकिस्तान का विरोध करके पाकिस्तान के खिलाफ होने वाले हमलों को तेज कर रहा है।
अफगानिस्तान पाकिस्तान के तनाव में तहरीक-ए-तालिबान की पाकिस्तान में गतिविधियाँ मुख्य वजह हैं। तालिबान यह एक उग्रवादी समूह है जो अब पूरे अफगानिस्तान को कंट्रोल कर रहा है ।
Durand Line
अफगानिस्तान पाकिस्तान की जो सीमा है उसे ड्यूरंड लाइन कहा जाता है। इसकी स्थापना 1893 मे हुई थी जो की सर मॉर्टिमर ड्यूरंड, जो ब्रिटिश भारत के विदेश सचिव थे, और अमीर अब्दुर रहमान ख़ान, जो अफ़ग़ानिस्तान के शासक (अमीर) थे, उन्होंने की थी। इसकी कुल लम्बाई 2640 किलोमीटर है।
इसको पाकिस्तान मे वेस्टर्न बॉर्डर ऑफ़ पाकिस्तान भी कहा जाता है। यह जो सीमा है वह पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा, बलूचिस्तान, और गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्रों को अफ़ग़ानिस्तान से अलग करती है। इसी सीमा को लेकर अफगानिस्तान पाकिस्तान मे तनाव का माहौल है।
तहरीक-ए-तालिबान की वापसी
तहरीक-ए-तालिबान यह जो संगठन है वह 2021 से अफगानिस्तान मे अपना कब्ज़ा करके वहा अपना राज चला रहे है। यह एक संघटन जो की अफ़ग़ान तालिबान का एक शाखा समूह है, पाकिस्तान पर होने वाले कई हमलों मे इसका हाथ है। खासकर के सीमा के नजदीक वाले प्रांतों में जैसे की खैबर पख्तूनख्वा प्रांत। तालिबान ने 2021 मे अफगानिस्तान पर एक सैन्य आक्रमण की मदद से अफगानिस्तान पर जित हासिल की थी।
अब 2025 मे इस संगठन ने पाकिस्तान पर हमलों का दौर तेज कर दिया है। ज्यादातर हमले पाकिस्तान की सेना के ठिकानों पर किये गए है जिससे पाकिस्तान की सेना सुरक्षा को बहुत नुकसान हुआ था। अप्रैल 2025 में, नॉर्थ वजीरिस्तान में पाकिस्तान की सेना ने एक बहुत बड़ी कारवाई की थी, जिसमे 71 आतंकवादी मारे गए थे। और ये भी खबर है की उनमे से कई तहरीक-ए-तालिबान के साथ जुड़े हुए थे।
इसमें अफगानिस्तान की भूमिका
अफगानिस्तान पाकिस्तान तनाव के बिच मे पाकिस्तान की सरकार अफगानिस्तान पर यह आरोप लगा रही है की, अफगानिस्तान की सरकार तहरीक-ए-तालिबान के जो आतंकवादी है उनको शरण दे कर उनको सुरक्षा दे रही है। पर अफगान तालिबान जो है वह इस आरोप को नकार रहा है। इस आरोप मे और उन्हों ने इसपर जो उत्तर दिया है वह पारदर्शी न होने के कारण तनाव बढ़ रहा है। रिपोर्ट्स यह भी बता रही है की तहरीक-ए-तालिबान के नेता, वे अफगानिस्तान मे आजादी से बिना किसी रोख टोक से ऑपरेशन कर रहे है। अपनी कही गयी बातों मे पारदर्शिता न होने के कारण दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ गया है।
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हाल ही की लड़ाई और नुकसान
अक्टूबर 2025 यानि हाल ही मे अफगानिस्तान पाकिस्तान के सीमा इलाकों में बहुत भीषण और गंभीर झड़पे हुई है।
12 अक्टूबर 2025 को खैबर पख्तूनख्वा का जो कुर्रम जिला है वहा बहुत बड़ा संघर्ष हुआ। यह जो संघर्ष हुआ उसमे दोनों देशों के बहोत लोग मारे गए।
इस तनाव से सीमा क्षेत्रों में प्रभाव
अफगानिस्तान पाकिस्तान के बिच जो संघर्ष और तनाव पूर्ण स्थिति है, इसने सीमा के नजदीक वाले गावों को और कस्बों को बहुत प्रभावित किया है।
कुर्रम और नॉर्थ वजीरिस्तान मे जो रहवासी है उन्हों ने अपना गांव छोड़कर दूसरे गावों मे स्थानांतरित हो गए हैं।
टोरख़म और स्पिन बोल्डक और कई और बड़े रस्ते जो की सीमा पार जाते थे वो अब बंद हो गए है। इसका असर ऐसा हुआ की व्यापार और जरूरी सामान की बहुत कमी हो गई है।
रास्ते और बाकि की सुविधाए स्थगित होने के कारण जो मानवतावादी संगठन है, वे मदद पहुचाने मे मुश्किलों का सामना कर रहे है।
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इससे होने वाली आंतरराष्ट्रीय चिंता
अफगानिस्तान पाकिस्तान मे जो तनाव का माहौल है उसपर आंतरराष्ट्रीय समुदायों ने गहरी चिंता दिखाई है।
चीन और ईरान जैसे राष्ट्रों ने शांति, सयम, और बातचीत से मसला हल करने की अपील की है।
संयुक्त राष्ट्र ने इन दोनों देशों से अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देकर उनकी रक्षा करने का आग्रह किया है।
निष्कर्ष
अफगानिस्तान पाकिस्तान इन दोनों देशों के बीच की स्थिति गंभीर है। और TTP इस गंभीर स्थिति मे केंद्रीय भूमिका निभा रहा है। दोनों देशों के ऐतिहासिक और मैत्री पूर्ण सम्बन्ध है, लेकिन अभी के हालत अविश्वास और टकराव से भरे हुए है। दोनों राष्ट्रों मे शांति स्थापित करने के लिए दोनों राष्ट्रों की सरकार और आंतरराष्ट्रीय समुदाय को समान प्रयास करने होंगे, ताकि हिंसा और टकराव को निर्माण करने वाले जो मुख्य कारण है, उनको सुलझाया जा सके और फिर से शांति स्थापित हो।
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